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UP जल निगम भर्ती घोटाला: सपा नेता आजम खां की भर्ती प्रक्रिया में भूमिका सामने आई, अब होगी फोरेंसिक जांच

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भर्ती प्रक्रिया में आजम खां की अहम भूमिका सामने आई है, क्योंकि वह नगर विकास मंत्री के साथ-साथ जल निगम के अध्यक्ष भी थे।

वित्त विभाग की मंजूरी के बिना भर्तियां शुरू करवा दीं थी | फोरेंसिक रिपोर्ट आजम की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।

जल निगम भर्ती सपा के शासनकाल में 2016 के अंत में हुई जल निगम में 1300 पदों पर वैकेंसी निकली थी। इसमें 122 सहायक अभियंता, 853 अवर अभियंता, 335 नैतिक लिपिक और 32 आशुलिपिक की भर्ती हुई थी।

SIT के मुताबिक घाटे में चल रहे जल निगम के लिए वित्त विभाग ने शासनादेश किया था कि उसकी स्वीकृत के बिना कोई भर्तियां नहीं की जाएंगी। इसके बावजूद नगर विकास विभाग के तत्कालीन सचिव एसपी सिंह ने बिना वित्त विभाग की मंजूरी के भर्तियां शुरू करवा दीं। भर्तियों के लिए प्रशासकीय अनुमति एसपी सिंह की तरफ से ही दी गई।

जल निगम भर्ती घोटाले की SIT जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया में आजम खां की अहम भूमिका सामने आई है, क्योंकि वह नगर विकास मंत्री के साथ-साथ जल निगम के अध्यक्ष भी थे।

अधिकारी ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया के तहत पत्रावलियों पर भी उनकी मंजूरी है। जांच में चयन प्रक्रिया भी दोषपूर्ण पाई गई है। साथ ही उत्तर पुस्तिकाओं की फोरेंसिक जांच ने भी संदेह को पुख्ता किया है। जांच की विश्वनीयता कायम रखने के लिए फोरेंसिक जांच SIT ने फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री हैदराबाद से कराई है।

चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले जिस तरह आनन-फानन में चयनित अभ्यर्थियों को कार्यभार ग्रहण कराया गया, उससे भी संदेह की पुष्टि हुई है। गड़बड़ियों की शिकायत लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले अभ्यर्थियों ने भी कई तरह के साक्ष्य उपलब्ध कराए।

शासन के निर्देश पर SIT ने अपनी प्रारंभिक जांच के आधार पर 25 अप्रैल 2018 को मुकदमा दर्ज किया था। इसमें आजम के अलावा तत्कालीन नगर विकास सचिव एसपी सिंह, जल निगम के पूर्व एमडी पीके आसुदानी व जल निगम के तत्कालीन मुख्य अभियंता अनिल खरे को नामजद करते हुए परीक्षा कराने वाली संस्था ‘एपटेक’ के अज्ञात अधिकारियों को भी अभियुक्त बनाया गया था।

आजम और उनके करीबी अधिकारी पर है घोटाले का आरोप

एसपी सिंह को आजम खां का सबसे करीबी अफसर कहा जाता था। उनके नगर विकास में सचिव रहने के दौरान चार साल तक प्रमुख सचिव की तैनाती नहीं हुई। वर्ष 2014 में रिटायरमेंट के बाद उनको सेवा विस्तार भी दिया गया था, जिसको लेकर कोर्ट ने सरकार को फटकार भी लगाई थी

सूत्रों की मानें तो SIT को इंतजार अप्टेक के उन कंप्यूटरों की फॉरेंसिक रिपोर्ट का है, जिसे जांच के लिए हैदराबाद भेजा गया था। यह रिपोर्ट आजम की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। SIT के अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि अगले एक सप्ताह में हैदराबाद से फॉरेंसिक रिपोर्ट मिल जाएगी और फिर जांच में तेजी लाई जाएगी। सूत्रों का कहना है कि SIT ने इस मामले में अधिकतर सुबूत इकट्ठा कर रखे हैं। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।

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Posted by: Lokesh kumar

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