ट्रेनों में लगे fans and lights चोरी क्यों नहीं होते हैं, कारण जानकर हैरान हो जायेंगे

इस समस्या के निराकरण हेतु पंखों और लाइट को 110 वोल्ट DC कर दिया गया जो कि ट्रक बैटरी की क्षमता 24 वोल्ट का साढ़े चार गुणा होता है।

fan in train

Railway की इस समस्या के निराकरण हेतु पंखों और लाइट को 110 वोल्ट DC कर दिया गया जो कि ट्रक बैटरी की क्षमता 24 वोल्ट का साढ़े चार गुणा होता है। इसीलिए बैटरी से इसे चलाया नहीं जा सकता है

और इस तकनीकी उपाय के बाद यह चोरी रुक गई, साथ ही ट्रेन के डिब्बों को तालाबंद करने की व्यवस्था को और दुरुस्त किया गया। और अपडेट किया गया।

पहले के जमाने मे ट्रेनों में लगे पंखे एवं लाइट की चोरी खूब होती थे। इस कदर चोरी होती थी कि पैसेंजर ट्रेनों में पंखे और लाइट सभी चीजों को चुरा लेते थे। आज लगाए और कल सारा सामान Train में गायब हो जाता था। यात्रीगण बिना पंखे के तपती गर्मी में सफर करने को मजबूर थे औऱ घनघोर अंधेरी रात में असुरक्षित यात्रा करने पर यात्रियों को परेशानी होती थी। रेलगाडी के अन्दर अधेरा और गर्मी होती थी।

Train से केवल पंखे एवं लाइट तक ही सीमित नहीं थी, बिजली पैदा करने वाले डाइनेमो का बेल्ट भी काट लिया जाता था। जिसे ऐसे असामाजिक तत्व फिर आटा चक्की या अन्य कार्यों के लिए प्रयोग करते थे।

एक बार बेल्ट कट गया तो पंखे और लाइट तो आप से आप काम करना बंद कर देंगे सो इनकी चोरी और भी आसान। इतना आसान कि चोरी हो और पता भी नहीं चले क्योंकि वे तो पहले से बंद हैं।
इन उपायों से चोरी रुक गई। साथ ही फ्लैट बेल्ट को हटाकर V बेल्ट का प्रयोग शुरू कर दिया गया। V बेल्ट को काटने के बाद दुबारा प्रयोग नहीं कर सकते थे।

भारतीय रेल में सवारी डिब्बों में बिजली के पंखे औऱ लाइट की शुरुआत बहुत पहले 1897 में ही शुरू हो गई थी और समय – समय पर इसके डिज़ाइन में परिवर्तन किए जाते रहे हैं।

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Posted by: Manoj Kumar

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