Sunday, November 1, 2020
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Navratri story: why is navratri celebrated in India and world

Navratri Special: Mata Rani will be happy on Navratri for just 5 rupees |...

On Navratri you can please Mata Rani with very simple and cheap measures. Know what are the navratri pooja Material cheap solutions- Let us know what materials are included in the worship of mother power in Navratri. Important Pooja material list for Navratri Festival Mother Durga’s photo or clay statue Red Chunari for offering to mother Mango leaves for the urn and the main door of the house Rice, a pedestal (to sit), vermilion to offer on mother Book of Durga Saptashati Barley seeds, earthen pot, betel leaves Gulal, red flowers, especially jaggery flowers, garlands Betel nut, cloves, cardamom Red Kalawa, Sandalwood, Ganges water, Honey Coconut, camphor, native ghee
krishna chalisa in hindi with meaning

Janmashtami: जन्माष्टमी के दिन पढिऐ श्री कृष्ण चालीसा, आपकी हर मनोकामना होगी पूरी

प्रस्तुत है कृष्ण चालीसा का पाठ दोहा बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम। अरुणअधरजनु बिम्बफल, नयनकमलअभिराम॥ पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पीताम्बर शुभ साज। जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज॥ चालीसा आरम्भ जय यदुनंदन जय जगवंदन। जय वसुदेव देवकी नन्दन॥ जै यशुदा सुत नन्द दुलारे। जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥ जै नट-नागर, नाग नथइया। कृष्ण कन्हइया धेनु चरइया॥ पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो। आओ दीनन कष्ट निवारो॥
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जानिए सावन में शिव चालीसा पढनें के लाभ, ऐसे पूजा करनें से खुश होते...

शिव चालीसा के सस्स्वर पाठ से मुश्किल काम को बहुत ही आसान किया जा सकता है। जाननें क लिए आगे पढिए। भगवान शिव चालीसा का श्रावण मास में करें 40 बार पाठ, ऐसे सरल विधि से करें पाठ और देंखें लाभ कितनी बार और कैसे करें शिव चालीसा का पाठ | kaise, aur kitani bar karain shiv chalisha ka path भक्तों को पाठ करने से पहले गाय के घी का दिया जलाएं और एक कलश में शुद्ध जल भरकर रखें। शिव चालीसा का 3,5,11 या फिर 40 बार पाठ करें।शिव चालीसा का पाठ बोल बोलकर करें जितने लोगों को यह सुनाई देगा उनको भी लाभ होगा। शिव चालीसा आरम्भ जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥ अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥

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