Rakha Bandhan Date and Time for this year in hIndi

इस बार रक्षाबंधन शुभ संयोग वाला और सौभाग्‍यशाली है, भाई की दाहिनी कलाई पर ही बहन को राखी बांधना चाहिए, आगे पढिए…

रक्षाबंधन हर साल सावन के समापन के साथ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, ये हमारे देश भारत के अलावा नेपाल और मॉरिशस में भी मनाया जाता है।

रक्षाबन्धन एक हिन्दू व जैन त्योहार है ये भारत में प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावण महीनें में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहा जाता हैं। Raksha Bandhan में राखी या रक्षासूत्र का बहुत अधिक महत्त्व है।

इस बार कब है रक्षाबन्धन | Rakha Bandhan Date and Time for this year in hIndi

तो इस बार रक्षाबन्धन 3 अगस्त 2020 को यानि सावन के समापन के साथ पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा। और इसी दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधेंगी। और भाई बहनो को रक्षा का वचन देंगें।

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साल 2020 में रक्षाबंधन का त्‍योहार सावन के आखिरी सोमवार को है, इसलिए इसका महत्‍व और ज्‍यादा बढ़ गया है। इस दिन भद्र काल नहीं है और न ही किसी तरह का कोई ग्रहण है, इसी वजह है कि इस बार रक्षाबंधन शुभ संयोग वाला और सौभाग्‍यशाली है।

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क्यों बांधती हैं बहने इस दिन अपने भाइयो के राखी | Why do you tie Rakhi to your brother on this day

पावन पर्व रक्षाबंधन भाई बहन के रिश्ते का प्रसिद्ध त्योहार है, रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य है। राखी जो कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे और सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है।

Raksha bandhan 2020 shubh muhurat

इस त्योहार के दिन बहने भगवान से अपने भाईयों की तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना करती है। राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं लेकिन ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों [पुत्री द्वारा पिता को] बाँधी जाती है।

क्यों बांधनी चाहिए दाऐं हाथ में राखी | Why should we put a rakhi in the right hand

दाऐं हाथ में राखी बांधने का धार्मिक कारण

माना जाता है दाएं हाथ पर राखी बांधने से ब्रह्मा की कृपा से कीर्ति, विष्णु की कृपा से रक्षा और महेश की कृपा से दुर्गुणों का नाश होता है। माता लक्ष्मी की कृपा से धन- धान्य, सरस्वती की कृपा से विद्या, बुद्धि और विवेक और मां दुर्गा की कृपा से शक्ति प्राप्त होती है। इसलिए दाहिने हाथ को अधिक महत्वता दी जाती है।

दाऐं हाथ में राखी बांधने का वैज्ञानिक कारण

मानव शरीर की विभिन्न नसें दहिने हाथ की कलाई में होकर ही गुजरती है, और मानव शरीर तब ही ठीक से काम कर सकता है। जब नसों में रक्त का संचार ठीक प्रकार से होगा। दाहिने हाथ की नसों से पूरे शरीर नियंत्रित किया जाता है।

राइट हाथ में राखी बांधने से वात, कफ और पित्त ये तीनों ही नियंत्रित किए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त भी रक्षा सूत्र से कई भयंकर बिमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए आयुर्वेद भी राखी बांधने के लिए सीधे हाथ की कलाई को ही प्राथमिकता देता है।

रक्षाबन्धन के पीछे की कहानी | Story of Raksha Bandhan in Hindi

हिन्दू धर्म में पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार रक्षाबंधन मनाने के पीछे कई कथाएं प्रचलित हैं।

श्रीकृष्‍ण और द्रौपदी की कथा-

महाभारत काल में कृष्ण और द्रौपदी का एक वृत्तांत मिलता है, जब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई। द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उसे उनकी अंगुली पर पट्टी की तरह बांध दिया।

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यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। श्रीकृष्ण ने बाद में द्रौपदी के चीर-हरण के समय उनकी लाज बचाकर भाई का धर्म निभाया था।

रक्षाबंधन मनाए जाने के पीछे कई ऐतिहासिक कारण भी हैं।

बादशाह हुमायूं और कमर्वती की कथा

मुगल बादशाह हुमायूं चितौड़ पर आक्रमण करने के लिए आगे बढ़ रहा था, ऐसे में राणा सांगा की विधवा कर्मवती ने हुमायूं को राखी भेजकर रक्षा वचन ले लिया।

और फिर क्‍या था हुमायूं ने चितौड़ पर आक्रमण नहीं किया, यही नहीं आगे चलकर उसी राख की खातिर हुमायूं ने चितौड़ की रक्षा के लिए बहादुरशाह के विरूद्ध लड़ते हुए कर्मवती और उसके राज्‍य की रक्षा की।

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Posted by: Neelu Gupta

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