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जन्माष्टमी की पूजा रात में 12:00 AM पर की जाती है, भगवान श्रीकृष्ण को खुश करने के लिए ऐसे करे पूजा, आगे पढिए

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और भक्ति के लिए उपवास करें। जन्माष्टमी के दिन अपने घर की विशेष सजावट करें।

जन्माष्टमी का त्योहार देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है, और इसे हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है।

भारत में दो दिन की होती है कृष्ण जन्माष्टमी

India में लोग अलग–अलग तरह से Janmashtami मानते हैं। वर्तमान समय में Janmashtami को दो दिन मनाया जाता है, 1st day साधू-संत जन्माष्टमी मानते हैं।

कृष्ण भगवान के मंदिरों में साधू–संत झूम-झूम कर कृष्ण की अराधना करते हैं। इस दिन संत महात्माओं का जमावड़ा मंदिरों में सहज है। उसके अगले दिन आम लोग जन्माष्टमी मानते हैं।

मथुरा में कृष्ण जन्माष्टमी का उल्लास | Janmashtami celebration in India

भगवान कृष्ण के जन्म के पावन मौके पर भगवान कान्हा की मोहक छवि देखने के लिए सुदूर इलाको से श्रद्धालु मथुरा पहुंचते हैं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर पूरी मथुरा और वहां पहुंचे श्रद्धालु कृष्णमय हो जाते है।

janmashtami article in hindi | How to do janmashtami poja and prasad

भारत के लगभग सभी मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है। मथुरा और आस-पास के इलाको में जन्माष्टमी में स्त्री के साथ-साथ पुरुष भी 12 बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती है और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है और रासलीला का आयोजन होता है।

श्यामसुन्दर का जन्मोत्सव नि:संदेह सम्पूर्ण विश्व के लिए आनंद-मंगल का संदेश देता है। सम्पूर्ण ब्रजमंडल, नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैय्या लाल की जैसे जयघोषों व बधाइयों से गुंजायमान होता है।

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ऐसे रखें जन्माष्टमी व्रत एवं पूजा करनें की विधि

हिन्दुओं के बिशेष त्योहार जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और भक्ति के लिए उपवास करें। अपने घर की विशेष सजावट करें। घर के अंदर सुन्दर पालने में बालरूप श्रीकृष्ण की मूर्ति स्थापित करें।

रात 12 बजे श्रीकृष्ण की पूजन के पश्चात प्रसाद का वितरण करें। माता-पिता और गुरुजनों के चरण स्पर्श कर उनसे आशीर्वाद लें। इसके साथ ही यह ध्यान रखें कि परिवार में कोई भी किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन बिल्कुल न करे। इस दिन के लिए आप अपने घर को सजा सकते हैं। और पूजा कर सकते है।

क्या है जन्माष्टमी का महत्व | How to celebrate Janmashtami in hindi

कान्हा की जन्माष्टमी का त्योहार देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है और इसे हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में आंठवा अवतार लिया था।

जन्माष्टमी की पूजा का समय-

इस कई लोग सुबह या शाम के वक्त पूजा करते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात को हुआ था, ऐसे में उस वक्त ही पूजा करना लाभकारी माना जाता है।

जन्माष्टमी की पूजा करने का सही तरीका-

पूजा क लिए साफ बर्तन

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में साफ बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए। ध्यान रहे कि वह बर्तन किसी भी मांसाहारी भोजन के लिए न इस्तेमाल किये गए हो।

किस दिशा में झांकी या मूर्ती रखें

जन्माष्टमी के दिन झांकी की दिशा का विशेष ध्यान रखें। दिशा की जानकारी के लिए आप विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं।

जन्माष्टमी की पूजा और भोग

भगवान श्रीकृष्ण को जन्माष्टमी के दिन पंचामृत का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

जन्माष्टमी के पावन त्योहार पर इस तरह के प्रसाद को लगाऐं भोग, खुश होंगें गोपाल

माखन मिश्री-

कान्हा जी को माखन मिश्री बहुत ही पसंद था, बाल रूप में वे चुराकर इन चीजों को खाते थे। जरुर इसे प्रसाद मे शामिल करें।

खीरा-

कृष्ण की पूजा में खीरा रखना भी बहुत जरूरी होता है।

गोला-मखाना पाक-

जन्माष्टमी में अधिकतर घरों में मखाना पाक बनता है, इसमें खूब सारे मेवे डालकर चीनी की चाश्नी में जमाया जाता है।

पंचामृत-

पंचामृत कान्हा जी की पूजा में रखना बहुत जरूरी है। याद रखें इसके बिना पूजा अधूरी होती है। पंचामृत में पांच चीजों का मिश्रण होता है, इसमें घी, दूध, दही तुलसी के पत्ते, गंगाजल और शहद मिलाया जाता है। ये भी प्यारा है कन्हैया को।

पंजीरी

जन्माष्टमी पर पंजीरी और चरणामृत बहुत ही आवश्यक होते हैं। आटे को भूनकर उसमें मिठा मिलाकर पंजीरी बनाई जाती है। यह उनका प्रमुख प्रसाद होता है।

इस बार जन्माष्टमी पर क्या न करें

आज जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को नई पोशाक जरुर पहनाएं। कई बार दुकानदार पुराने कपड़े नए के रुप में बेच देते हैं। ऐसे में खरीदारी के वक्त इसका ध्यान रखें।

इस साल जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त-

12 अगस्त को पूजा का शुभ समय रात 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक है। पूजा की अवधि 43 मिनट तक रहेगी।

Posted by: Anshika Gupta

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