भीष्म पितामह ने अर्जुन को चार प्रकार के भोजन न करने को कहा था, आगे पढिऐ…

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भोजन करने न करने के बारे में लोगों की अलग-अलग आस्था है, कुछ लोग भोजन से पहले भगवान को भोग लगाते है। और कुछ लोग ऐसे भोजन को पसन्द नही करते जो किसी उनके लिऐ अशुभ है।

इस प्रकार का भोजन न करें, भीष्म पितामह ने अर्जुन को चार प्रकार से भोजन न करने की सलाह दी थी।

कौन से चार प्रकार के भोजन ग्रहण नही करने चाहिए

पितामह ने अर्जुन को चार तरह के भोजन न ग्रहण करने को कहा था ये थे भोजन के प्रकार

पहला ये भोजन न ग्रहण करें-

जिस भोजन की थाली को कोई लांघ कर चला जाये, वह भोजन की थाली नाली में पड़े कीचड़ (गंदगी) के समान होती है। उसे ग्रहण नही करना चाहिए।

दूसरा इस प्रकार भोजन न करें-

ऐसी भोजन की थाली जिसमें ठोकर लग गई हो, पाव लग गया वह भोजन की थाली भिष्टा के समान होता है, इस भोजन को खाना उचिक नही है।

तीसरे प्रकार का भोजन न लें-

जिस भोजन की थाली में सिर का बाल पढा हो, केश गिर गया हो वह दरिद्रता के संकेत होता है।

चौथा ऐसा भोजन न करें-

अगर पति और पत्नी एक ही थाली में भोजन कर रहे हो तो वह मदिरा के तुल्य होता है।

गीता में भीष्म पितामह ने अर्जुन को भोजन के बारे दिया ज्ञान

सुनो अर्जुन अगर पत्नी, पति के भोजन करने के बाद थाली में भोजन करती है उसी थाली में भोजन करती है या फिर पति का बचा हुआ खाना खाती है तो पत्नी को चारों धाम के पुण्य का फल जरुर प्राप्त होता है।

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यदि 2 भाई 1 थाली में भोजन ग्रहण कर रहे हो तो वह अमृतपान के समान होता है चारों धाम के प्रसाद के तुल्य वह भोजन हो जाता है।

भीष्म पितामह ने अर्जुन को खाने के बारे में ये बताया

सुनो कुन्तीपुत्र अर्जुन

बेटी यदि अविवाहित हो और अपने पिता के साथ खाना खाती है एक ही थाली में, तो उसके पिता की कभी भी अकाल मृत्यु नहीं होती। क्योंकि बेटी ही पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती है।

इसीलिए बेटी जब तक कुमारी रहे, तो अपने पिता के साथ बैठकर भोजन करें। क्योंकि पुत्री ही अपने पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती हैं। पिता भी अपनी पुत्री के साथ भोजन करें।

बिना संस्कार दिऐ सुबिधाऐं न दें-

गीता में कहा गया है कि संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है। तो बच्चों को संसकार जरुर दें।

“यदि सुविधाएं आपने बच्चों को नहीं दी तो हो सकता है वह थोड़ी देर के लिए रोए, लेकिन संस्कार नहीं दिए तो वह जिंदगी भर रोऐगा।“

गीता से-

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Posted by: Neelu Gupta

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